बी सेफ फाउंडेशन फॉर अवेयरनेस एंड हेल्थकेयर द्वारा संचालित कैंसर जागरूकता अभियान से मिल रहा जरूरतमंदों को लाभ

देहरादून। उत्तराखंड के रायवाला में स्थित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन, बी सेफ फाउंडेशन फॉर अवेयरनेस एंड हेल्थकेयर, जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर, विशेषज्ञ सत्रों और स्क्रीनिंग के माध्यम से हरिद्वार और देहरादून जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर जागरूकता अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहा है। यह पहल लोगों को आम कैंसर, जोखिम कारकों, जीवनशैली में बदलाव और समय रहते पता लगाने के महत्व के बारे में शिक्षित करती है। इससे प्रतिदिन लोगों को फायदा मिल रहा है और वे कैंसर के जोखिम से दूर हो रहे हैं।
इस पहल के बारे में बोलते हुए, बी सेफ फाउंडेशन फॉर अवेयरनेस एंड हेल्थकेयर की संस्थापक बेला वर्मा ने कहा कि “जल्दी पता लगने से जान बचती है। इस अभियान के माध्यम से, हम लोगों को ज्ञान से सशक्त बनाना चाहते हैं और हमारे समाज में कैंसर के बोझ को कम करने के लिए समय पर मेडिकल चैकअप को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। कैंसर पूरे भारत में तेजी से फैल रहा है और शुरुआती लक्षणों की कमी से इसका पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, अगर समय रहते इसका पता चल जाए तो ज्यादातर कैंसर का 100 प्रतिशत इलाज संभव है। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है, नियमित जांच, सालाना टेस्ट और लाइफस्टाइल में बदलावों की निगरानी से जान बच सकती है। बिना वजह वजन कम होना, खाना निगलने में कठिनाई, गांठ, लगातार सिरदर्द, धुंधली दृष्टि या मूत्र/मल में खून जैसे चेतावनी संकेतों पर नजर रखें। जैसा कि कहा जाता है, रोकथाम इलाज से बेहतर है। जागरूक रहें, स्वस्थ रहें।
इस पहल के बारे में और विस्तार से जानकारी देते हुए, उन्होंने कहा, हम उपहारों और पार्टियों पर हजारों खर्च करते हैं, तो अपने स्वास्थ्य पर निवेश क्यों न करें? वह भी काफी कम खर्च पर। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा एनजीओ कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने और शुरुआती पहचान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने, जांच करने और जान बचाने के लिए हमें आपके समर्थन की जरूरत है। हर बड़ा या छोटा योगदान बदलाव ला सकता है। जागरूकता और कार्रवाई के माध्यम से कैंसर से लड़ने के इस मिशन में हमारे साथ जुड़ें। साथ मिलकर हम एक स्वस्थ भविष्य बना सकते हैं, हमने हरिद्वार और देहरादून जिलों में अभियान सफलतापूर्वक चलाया है और धीरे-धीरे इसे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और भारत के अन्य क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों का इसका लाभ मिले।

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