विरासत महोत्सव-2026 के शानदार और भव्य बारहवें दिन भी स्कूली बच्चों का दिखा हुनर और जुनून

देहरादून : विरासत में मंगलवार को भी कई स्कूली बच्चों ने उत्साह पूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी शिल्पकारी का बड़े खूबसूरत और बेहतर रूप में प्रदर्शित किया I दर्शकों एवं विरासत के सभी मौजूद मेहमानों ने बच्चों की कलाकृतियों को काफी अधिक सराहा गया I
विरासत महोत्सव-2026 के अंतर्गत लिटिल माइंड स्कूल के 22 विद्यार्थियों के लिए मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में हस्तशिल्प कार्यशाला आयोजित की गई। आयोजित की गई इस वर्कशाॅप में विद्यार्थियों ने टेराकोटा और टाई-एंड-डाई कला की बारीकियों को जाना और इन पारंपरिक शिल्प विधाओं में रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक हस्तकलाओं से परिचित कराना और उन्हें स्वयं कला कृतियाँ बनाने का अवसर प्रदान करना रहा है। मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कल्पना शीलता तथा रचनात्मकता को अभिव्यक्त भी किया। विरासत द्वारा आयोजित की जा रही प्रतिदिन की विरासत साधना में अब तक हजारों बच्चे उत्साह, जुनून और उमंग के साथ प्रतिभाग करते हुए अपने हुनर का भव्य एवं शानदार प्रदर्शन दर्ज कर चुके हैं I
भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण मंच है विरासत महोत्सव : संजय जोशी
द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीएमडी संजय जोशी ने भी आज मंगलवार को विरासत महोत्सव में पहुंचकर विरासत की शोभा बढ़ाई I
इस अवसर पर उन्होंने इस विरासत महोत्सव के भव्य आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि महोत्सव भारतीय कला और शिल्प परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विरासत महोत्सव का हिस्सा बनकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का शक्तिशाली प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विरासत महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने की कामना भी की और उन्होंने ‘विरासत’ को हर संभव तरीके से संरक्षण और आर्थिक सहायता देने का भी वादा किया।
बारहवें दिन की शाही सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीएमडी  संजय जोशी तथा रीच संस्था के संस्थापक आरके सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया I

मंगलवार की सांस्कृतिक संध्या मशहूर मुजफ्फर रहमान के वाद्य ताल से हुई मंगलमयी
महकी विरासत : ताल वाद्य कचहरी की प्रस्तुति से छा गई दीवानगी
विरासत की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल में आज मंगलवार को उस समय दीवानगी का आलम देखने को मिला, जब वहां पर विख्यात हस्ती मुजफ्फर रहमान की दमदार ताल वाद्य कचहरी की प्रस्तुति हुई I विरासत महोत्सव -2026 में आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति देने वाले कलाकार मुजफ्फर रहमान और उनके आठ सदस्यीय समूह द्वारा ताल वाद्य कचहरी (लयबद्ध वाद्य संगीत सत्र) प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में विभिन्न वाद्ययंत्रों की मधुर और लयबद्ध संगति से श्रोताओं को संगीत का विशेष अनुभव भी मिला ।
इस भव्य व आकर्षक प्रस्तुति में मुजफ्फर रहमान, अयान हुसैन और रमजान हुसैन तबला, ऐश्वर्या आर्य पखावज पर, सरफराज ढोलक, रमेश मीना हारमोनियम, इरफान सितार पर और जाकिर हुसैन सारंगी ने जोशीली संगत की दमदार भूमिका अदा की, जो कि काफ़ी सराहनीय रही। कार्यक्रम की खूबसूरत शुरुआत सुप्रसिद्ध राजस्थानी मांड ‘केसरिया बालम’ से होकर ठुमरी के समापन के साथ लयबद्ध मधुरम वातावरण में सम्पन्न हुई I

विरासत के भव्य मंच पर दिखा मशहूर सितार वादक “समन्वय सरकार” के सुरों एवं सितार वादन का जादू
अद्भुत प्रस्तुति देख कर ओत-प्रोत हुए शाही मेहमान, सभी के हृदय और मन हो उठे प्रफुल्लित
विरासत का भव्य मंच आज मंगलवार को भी काफी खुशनुमा एवं शाही अंदाज से लबालब रहा I आज की सांस्कृतिक संध्या में मशहूर सितार वादक एवं सुर बहार वादक “समन्वय सरकार” के सुरों का अद्भुत जादू चला और शाही महफिल में वातावरण पूरी तरह से मग्न मुग्ध हो उठा I उनकी प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और सुरों की सुंदरता को मंच पर साकार किया। उनके द्वारा दी गई इस शानदार एवं भव्य शाही प्रस्तुति में दिनेश तुलसी भट्ट ने तानपुरे पर और शुभ महाराज ने तबले पर अद्भुत संगत की। कार्यक्रम की शुरुआत “राग हेमंत” से हुई और समापन राग “मांझ खमाज” के साथ हुआ। विरासत के मंच पर दी गई इस शानदार प्रस्तुति ने सितार, तानपुरे और तबले की मधुर संगति ने श्रोताओं को संगीत का एक यादगार अनुभव प्रदान कर किया आज बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति दर्ज कर दी I
समन्वय सरकार एक सितार वादक और सुर बहार वादक हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा और वर्षों के समर्पित अभ्यास से तराशा है। उन्हें मॉस्को में ब्रावो अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय शास्त्रीय संगीतकार के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई है, और राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार और अखिल भारतीय रेडियो और दूरदर्शन द्वारा ग्रेड ए का राष्ट्रपति पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।
समन्वय सरकार का संगीत रागों के प्रति गहन चिंतन और ध्यानपूर्ण दृष्टिकोण के साथ उनकी परंपरा की गहराई को समाहित करता है। समन्वय ने सेनिया घराना के पंडित शशांक बंदोपाध्याय से अपना प्रशिक्षण शुरू किया और पद्म विभूषण गिरिजा देवी के मार्गदर्शन में सेनिया, मैहर, बिष्णुपुर और आगरा अत्रौली परंपराओं का अध्ययन करते हुए पंडित मणिलाल नाग, पंडित श्यामल चटर्जी और पंडित कुमार प्रसाद मुखर्जी से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने ख्याल, ठुमरी, तप्पा और तप्प ख्याल सहित कई गायन शैलियों का अध्ययन किया और उनकी सूक्ष्मता और बारीकियों को अपने सितार वादन में समाहित किया। उनकी कलात्मक और व्यक्तिगत विकास के प्रत्येक अध्याय के पीछे उनके पिता, स्वपन कुमार सरकार का योगदान है। वे ललित मोहन सान्याल के शिष्य रहे और उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब के वरिष्ठ छात्र थे, जिनके मार्गदर्शन ने संगीत, कला और खेल में उनके मार्ग को आकार दिया।
उन्होंने भारत भर में विरासत, शास्त्रीय संगीत सम्मेलन, पश्चिम बंगाल राज्य संगीत एवं नृत्य अकादमी, कोमल निषाद, एलएनजी भीलवाड़ा, मल्हार महोत्सव, आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी, गुरुग्राम महोत्सव, बिष्णुपुर महोत्सव, कालिदास समारोह, सवाई गंधर्व, सप्तक, स्वर मंगेश और स्वर सम्राट जैसे कई प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है। इसके अलावा उन्होंने जर्मनी, पेरिस, डब्ल्यूओएमएडी (यूके), रूस और उज्बेकिस्तान में सितार महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रस्तुति दी है। समनवाया ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र ‘गिरिजा ए लाइफटाइम इन म्यूजिक’ का सह-निर्देशन किया है और उन्होंने ‘इरिडेसेंट’ और ‘संवाद’ नामक एल्बम भी जारी किए हैं। यही कारण है कि समन्वय सरकार आज अपने संगीत वादन के लिए देश विदेश में ख्याति प्राप्त किए हुए हैं I

महेश काले ने सजा डाली सांस्कृतिक संध्या की खूबसूरत महफ़िल और सभी को बना लिया दीवाना,,,,,
शास्त्रीय संगीत और गायन के सम्राट जादूगर महेश काले ने महकाया विरासत का मंच
काले के मधुर राग और सुरों-धुन की प्रस्तुति बनी विरासत महोत्सव-2026 की चश्मदीद गवाह
प्रख्यात गायक महेश काले ने अपनी सुमधुर गायन प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और उपशास्त्रीय संगीत की मधुरता का सुंदर संगम बहुत ही नज़दीक से आज बड़े ही मनमोहक अंदाज़ में देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय गायन से हुई, जिसके बाद अर्धशास्त्रीय प्रस्तुतियों ने संगीत संध्या को और भी सुरमय बना दिया। भव्य एवं दिल को छू लेने वाली इस प्रस्तुति में प्रसाद पाध्ये ने तबले पर, हर्षल काटदारे ने हारमोनियम पर तो रोहित खवले ने पखावज पर सराहनीय और खूबसूरत संगत दी I यही नहीं, अपूर्व गोखले ने वायलिन पर और अभिषेक भुरुक ने परकशन पर संगत देकर सभी को मदहोश कर दिया I महेश काले को स्कूल ऑफ म्यूजिक के तीन विद्यार्थियों ने कोरस में साथ दिया। कलाकारों की सुरमयी संगति और भावपूर्ण गायन ने श्रोताओं को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का यादगार अनुभव प्रदान करते हुए खूबसूरती का अमलीजामा पहना दिया।
महेश काले हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के उभरते हुए कलाकार हैं। उन्होंने पद्मश्री पंडित जितेंद्र अभिषेकी से गुरुकुल प्रणाली में गायन कौशल का विकास किया। भारत के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायक महेश काले न केवल एक उत्कृष्ट कलाकार हैं, बल्कि एक शिक्षक और समाज सुधारक भी हैं।
उन्होंने फिल्म ‘कट्यार कलजात घुसली’ (2016) में अपने शास्त्रीय गायन के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है और भारत, अमेरिका, यूरोप, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया में व्यापक रूप से प्रदर्शन किया है। महेश काले को शास्त्रीय और गैर-शास्त्रीय श्रोताओं के बीच की खाई को सफलतापूर्वक पाटने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ है। महेश को महाराष्ट्र राज्य सरकार पुरस्कार, प्राइड ऑफ इंडिया और द आइकॉन फॉर द यूथ जैसे कई अन्य पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
उन्हें रेडियो मिर्ची, ज़ी, संस्कृति पुरस्कार जैसे कई मुख्यधारा के पुरस्कार भी मिले हैं। उन्होंने विभिन्न पुरस्कारों के लिए निर्णायक के रूप में भी कार्य किया है। वे एक लोक प्रिय संगीत टीवी शो में जज भी रह चुके हैं। उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को आधुनिकता का स्पर्श देते हुए मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने देश-विदेश के विश्व प्रसिद्ध कलाकारों के साथ भी कई प्रस्तुति दी है। पश्चिमी जगत में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति जागरूकता और शिक्षा फैलाने के प्रयास में महेश ने स्टैनफोर्ड विश्व विद्यालय, हार्वर्ड विश्व विद्यालय, टेड एक्स और कॉमनवेल्थ क्लब सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में व्याख्यान-प्रदर्शन और वार्ताएं दी हैं। वे इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड आर्ट्स फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं, जो एक गैर-लाभकारी संस्था है I

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