उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बना 1 वर्ष के शिशुओं के लिए वरदान
एमडी एनएचएम सोनिका ने दी चलाये जा रहे कार्यक्रम की अहम उपलब्धियों की जानकारी
कटे होंठों/तालु विकार, जन्मजात मोतियाबिंद, भेंगापन व मुड़े हुए पैर जैसे 254 मामलों में कराया निशुल्क इलाज
देहरादून। उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य सेवाओं के तहत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की सेवाएं 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में बताते हुए मिशन निदेशक सोनिका ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चम्पावत जनपद की 01 वर्षीय बालिका दीक्षिता को कटे होठं एवं तालु विकार से पीड़ित होने पर जनपद की आरबीएसके टीम की ओर से उन्हें हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट देहरादून में निःशुल्क सर्जरी की। सुविधा उपलब्ध कराई गयी और अब दीक्षिता कटे होठं एवं तालु विकार से मुक्त हो कर पूर्ण रूप से स्वस्थ
हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से वर्ष 2013-14 से राज्य में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है जिसके तहत चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की टीम समस्त सरकारी स्कूलों तथा आगनबड़ी केन्द्रों में जा कर 0-18 वर्ष आयु के बच्चों का स्वास्थ परीक्षण करती है। स्वास्थ परीक्षण के के बाद चिन्हित 32 प्रकार की बीमारियों में से कोई भी रोग होने पर उस बच्चे को नजदीकी चिकित्सालय पर निशुल्क उपचार के लिए संदर्भित किया जाता है।
राज्य में 148 मोबाईल हैल्थ टीमें कर रही काम
देहरादून। एनएचएम मिशन निदेशक सोनिका ने बताया कि राज्य में 148 मोबाईल हैल्थ टीम कार्य कर रही हैं जो समस्त सरकारी विद्यालयों, शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी में पंजीकृत बच्चों का स्वास्थ परीक्षण कर रही है। यह टीम एक वर्ष के दौरान स्कूलों में एक बार तथा आंगनबाड़ी में दो बार जाती है। सोनिका के अनुसार रोग ग्रस्त बच्चों को गुणवता पूर्ण उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से जिला चिकित्सालयों पर विशिष्ठ उपचार केन्द्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
अति गंभीर मामलों में इलाज को बड़े अस्पताल सूचीबद्ध
देहरादून। अति गम्भीर मामलों में उपचार के लिए सरकार ने एम्स ऋषिकेश, हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट, फोर्टिस अस्पताल, देहरादून को सूचीबद्ध किया है। शीघ्र ही मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी एवं देहरादून को भी इस सुविधा के लिए शामिल कर लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम की सुविधाओं को अधिक व्यापक बनाने के लिए क्योर इन्टरनेशनल इंडिया टंस्ट, स्माईल टंेन तथा मिशन स्माईल नाम की स्वैच्छिक संस्थाएं भी कार्य कर रही है।
आरबीएसके में 254 बच्चों पर सरकार ने खर्च किए 80 लाख
देहरादून। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक एनएचएम डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान उत्तराखण्ड में कटे होंठों/तालु विकार से ग्रसित 38 बच्चों, जन्मजात मोतियाबिन्द एवं भेंगापन के 16, दिल में छेद के 34, न्यूरलट्यूब डिफेक्ट ग्रसित 63, एवं मुड़े हुए पैर वाले 94 बच्चों का निशुल्क ईलाज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के द्वारा कराया गया है। सरकार ने इन बच्चों के उपचार पर लगभग रू0 अस्सी लाख खर्च किए हैं।